व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

स्टेट डूमा ने भारत और रूस के बीच हुए RELOS सैन्य समझौते को दी मंजूरी

नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 4, 2025 3:39 अपराह्न
Follow Us:

पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस की संसद स्टेट डूमा ने भारत और रूस के बीच हुए RELOS सैन्य समझौते को मंजूरी दे दी है, यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के एयरबेस, बंदरगाह और सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है।

RELOS

इसका उपयोग संयुक्त अभ्यास, राहत कार्यों और सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट में किया जाएगा, जिससे रक्षा सहयोग और मजबूत होगा। खास बात यह है कि यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 से 5 दिसंबर तक भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। इस समझौते का नाम रिसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS) है और यह दोनों देशों के सैन्य सहयोग को और मजबूत करेगा।

बीते 18 फरवरी को साइन हुआ था समझौता

यह समझौता इस साल 18 फरवरी को भारत और रूस के बीच साइन हुआ था।पिछले हफ्ते रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे संसद में मंजूरी के लिए भेजा था।अब डूमा की मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होने के अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के एयरबेस, बंदरगाह और सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है। इसका उपयोग संयुक्त अभ्यास, राहत कार्यों और सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट में किया जाएगा, जिससे रक्षा सहयोग और मजबूत होगा।

You may also read – Major Preparations in India’s Defence sector: New Equipment and New Challenges

जानिये क्या है RELOS समझौता?

यह समझौता इस साल 18 फरवरी को भारत और रूस के बीच साइन हुआ था। पिछले हफ्ते रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे संसद में मंजूरी के लिए भेजा था

RELOS

अब डूमा की मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होने के अंतिम चरण में पहुंच गया है। RELOS समझौते के तहत भारत और रूस की सेनाएं एक-दूसरे की जमीन, एयरबेस, समुद्री बंदरगाह और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी। यानी कि दोनों देश एक-दूसरे की सेनाओं को ईंधन, मरम्मत, भोजन, उपकरण और अन्य लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर पाएंगे, इससे सैन्य अभियान चलाने में आसानी होगी।

रूसी संसद के स्पीकर का बयान

रूस की संसद के निचले सदन ड्यूमा की वेबसाइट पर पोस्ट एक नोट में रूसी मंत्रिपरिषद ने कहा कि दस्तावेज की मंजूरी से रूसी और भारतीय युद्धपोतों को दोनों देशों के हवाई क्षेत्र और बंदरगाहों के पारस्परिक इस्तेमाल की सहूलियत मिलेगी। रूसी संसद के स्पीकर व्याचस्लाव वोलोदिन ने कहा कि भारत के साथ हमारे संबंध रणनीतिक और व्यापक हैं।इस समझौते की मंजूरी हमारे रिश्तों को और मजबूत करेगी।

कब होगा इसका इस्तेमाल?

यह समझौता कई स्थितियों में काम आएगा, जैसे कि संयुक्त सैन्य अभ्यास, सेनाओं का प्रशिक्षण, मानवीय सहायता, प्राकृतिक आपदाओं में राहत और अन्य विशेष परिस्थितियां।‌रूसी कैबिनेट ने बताया कि इस समझौते से दोनों देशों के विमान एक-दूसरे के एयरस्पेस का उपयोग कर सकेंगे. दोनों के युद्धपोत एक-दूसरे के बंदरगाहों में रुक सकेंगे।जरूरत पड़ने पर सैन्य उपकरणों और सैनिकों को तेजी से सपोर्ट मिल सकेगा।भारत और रूस का रक्षा सहयोग‌और गहरा होगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment