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मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी भारत रत्न  डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती देशभर में तैयारी शुरू

मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी भारत रत्न  डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती देशभर में तैयारी शुरू
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 6, 2026 9:41 अपराह्न
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मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की 135वीं जयंती पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी। देशभर में इसकी तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं। यह दिन केवल एक अवकाश नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के संकल्प को दोहराने का उत्सव है।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर – एक महान जीवन यात्रा

​ जन्म और प्रारंभिक जीवन

  • जन्म –  14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में।
  • परिवार –  वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं संतान थे। उनका परिवार महार जाति से था, जिसे उस समय ‘अछूत’ माना जाता था।
  • शिक्षा का संघर्ष –  बचपन में उन्हें स्कूल में भारी भेदभाव का सामना करना पड़ा। वे कक्षा के बाहर बैठकर पढ़ते थे और उन्हें पानी पीने तक की आजादी नहीं थी।

​शैक्षणिक उपलब्धियां

​डॉ. अंबेडकर दुनिया के सबसे शिक्षित व्यक्तियों में से एक थे। उनकी शैक्षणिक योग्यता आज भी प्रेरणा का स्रोत है

  • मुंबई विश्वविद्यालय –  1907 में मैट्रिक और बाद में एल्फिंस्टन कॉलेज से स्नातक।
  • कोलंबिया विश्वविद्यालय (USA) – बड़ौदा के महाराज सयाजीराव गायकवाड़ की छात्रवृत्ति पर उन्होंने यहाँ से MA और Ph.D. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।
  • लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (UK) – उन्होंने यहाँ से ‘Master of Science’ और ‘Doctor of Science’ की डिग्री ली।
  • ग्रेज इन (लंदन) –  उन्होंने ‘बैरिस्टर-एट-लॉ’ की उपाधि प्राप्त कर वकालत की शिक्षा पूरी की।

​सामाजिक सुधार और मुख्य आंदोलन

​बाबासाहेब ने अपना पूरा जीवन छुआछूत और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ाई में समर्पित कर दिया।

  • बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924) –  दलितों में शिक्षा के प्रचार और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए इसकी स्थापना की।
  • महाड़ सत्याग्रह (1927) –  सार्वजनिक चोदार तालाब से पानी पीने के अधिकार के लिए उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन किया।
  • मनुस्मृति दहन (1927) – जातिगत भेदभाव और असमानता के प्रतीक के रूप में उन्होंने मनुस्मृति का दहन किया।
  • कालाराम मंदिर आंदोलन (1930) –  नासिक में दलितों को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए संघर्ष किया।

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​राजनीतिक और संवैधानिक योगदान

  • संविधान के शिल्पकार –  डॉ. अंबेडकर स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री और संविधान मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे। उन्होंने भारतीय संविधान के माध्यम से लोकतंत्र, समानता और बंधुत्व की नींव रखी।
  • श्रमिकों के मसीहा –  उन्होंने भारत में काम के घंटों को 12 से घटाकर 8 घंटे करवाया। मातृत्व लाभ (Maternity Benefit) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसे कानून उन्हीं की देन हैं।
  • आरबीआई (RBI) की स्थापना –  भारतीय रिजर्व बैंक की परिकल्पना उनके शोध ग्रंथ “The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution” पर आधारित है।

धम्म परिवर्तन (बौद्ध धर्म)

​अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, उन्होंने समानता की तलाश में हिंदू धर्म त्यागने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू पैदा जरूर हुआ था, लेकिन हिंदू मरूंगा नहीं।”  14 अक्टूबर 1956 नागपुर के दीक्षाभूमि में उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया।

​प्रमुख कृतियां (पुस्तकें)

​उनके विचार आज भी उनकी पुस्तकों के माध्यम से जीवित हैं

  • जाति का विनाश (Annihilation of Caste)
  • बुद्ध और उनका धम्म (The Buddha and His Dhamma)
  • पाकिस्तान पर विचार (Thoughts on Pakistan)
  • शूद्र कौन थे? (Who Were the Shudras?)

​महापरिनिर्वाण और सम्मान

  • निधन –  6 दिसंबर 1956 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। इस दिन को ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
  • भारत रत्न – 1990 में मरणोपरांत उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

​2026 में जयंती समारोह की तैयारियां

​इस वर्ष देशभर में कई भव्य आयोजन प्रस्तावित हैं

  • चैत्य भूमि (मुंबई) और दीक्षा भूमि (नागपुर) –  लाखों अनुयायियों के जुटने की संभावना के मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की जा रही है।
  • शैक्षणिक कार्यक्रम –  स्कूलों और कॉलेजों में बाबासाहेब के विचारों पर संगोष्ठियां और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
  • डिजिटल उत्सव –  सोशल मीडिया पर उनके महान विचारों के प्रसार के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

शुभकामना संदेश

​”ज्ञान की शक्ति से समाज को बदलने वाले, समानता के अग्रदूत और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आइए हम सब मिलकर उनके शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो के मंत्र को अपने जीवन में उतारें।”

​”समानता एक कल्पना हो सकती है लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना चाहिए।” 

डॉ. बी.आर. अंबेडकर

जय भीम

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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