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वीरेंद्र सहवाग का दोहरा शतक- जब गाना गाते-गाते वीरू ने ठोका था वनडे में 200, टीम इंडिया का बना दिया था बड़ा रिकॉर्ड

वीरेंद्र सहवाग
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 8, 2025 6:40 अपराह्न
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वो पारी जिसने भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदल दिया

भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई महान पारियां दर्ज हैं, लेकिन कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ आंकड़ों के कारण अमर नहीं होतीं, बल्कि इसलिए याद रहती हैं क्योंकि वे किसी खिलाड़ी की शख्सियत और जज्बे को बयान करती हैं। वीरेंद्र सहवाग की साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में ठोकी गई 219 रन की तूफानी पारी भी कुछ ऐसी ही घटना थी।

वीरेंद्र सहवाग ने ठोका था वनडे में 200


यह सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि विश्व क्रिकेट के लिए एक नया अध्याय थी। इससे पहले सचिन तेंदुलकर का 200* वनडे में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था। सहवाग ने उसे तो तोड़ा ही, साथ ही वनडे इतिहास में दूसरा दोहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी भी बन गए,और सबसे दिलचस्प बात यह पारी वीरू ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में खेली—मस्ती, जोश और गुनगुनाते हुए!

वीरू का अंदाज़: “मैं तो बस गाना गुनगुना रहा था…”

मैच के बाद सहवाग ने एक मज़ेदार बयान दिया था, जिसने इस पारी को और यादगार बना दिया—
“मैं हर बॉल पर गाना गुनगुना रहा था,तू जय-जय शिवशंकर, कांटा लगे न कंकर…”

यही था वीरू का अंदाज़। न दबाव, न चिंता। बॉल सामने आई, तो पूरी ताकत से बल्ला घुमाया। इस पारी के दौरान उन्होंने किसी तेज़ गेंदबाज़ या स्पिनर को सम्मान न देते हुए लगातार अटैक मोड में बल्लेबाज़ी की। उनका यह स्टाइल टीम के बाकी खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए भी ऊर्जा लेकर आया। मैदान में हर चौका-छक्का जैसे वातावरण को “फ्लैश” करता जा रहा था।

मैच का हाल: लक्ष्मीनगर के मैदान से ‘पावरप्ले शो’ की शुरुआत

यह मैच इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेला गया था। विकेट बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग जैसे हालात लिए हुए था। भारतीय कप्तान ने पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया और सहवाग ने शुरुआत से ही अपना इरादा साफ कर दिया।

पहला 50 – पावरप्ले में आंधी

पहले 10 ओवर में ही जितने चौके लगे, उतने शायद कुछ टीमों के 40 ओवर में लगते हैं। गेंदबाज़ों पर लगातार दबाव बढ़ता गया और वे लाइन–लेंथ खोज ही नहीं पाए।

100 रन – बिना किसी रुकावट के

सहवाग ने 60 गेंदों में शतक पूरा किया और दर्शकों की उम्मीदें अब रफ्तार पकड़ने लगीं। वह अपने अंदाज़ में खेलते रहे—न कोई ड्रामा, न फैंसी शॉट्स—बस सहवाग का क्लासिक “कट”, “पुल” और लंबी ड्राइव।

वीरेंद्र सहवाग की 219 की पारी – कैसे गढ़ा गया यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड

  1. बेलगाम आक्रामकता

सहवाग ने अपनी पारी में कुल 25 चौके और 7 छक्के लगाए। हर बाउंड्री उनके इरादों को और मजबूत करती गई। हर शॉट में एक ही संदेश था—“मेरे आगे रफ्तार भी छोटी पड़ जाती है।”

  1. टीम रणनीति का केंद्र बने सहवाग

भारत के पास इस मैच में बड़े स्कोर का मौका था। गौतम गंभीर ने दूसरे छोर से बढ़िया साथ दिया, लेकिन टीम इंडिया की रणनीति साफ थी— वीरू तब तक खेलें जब तक विपक्ष की सांसें न टूट जाएं। मैदान में हर ओवर एक खतरा बनकर आता था—वेस्टइंडीज़ के लिए।

  1. हर गेंद पर अटैक—न रुकना, न झुकना

जब वीरू 150 के पार पहुंचे, तब भी उनका स्ट्राइक रेट लगभग 120–130 के बीच था। उन्होंने कभी ‘सेट होने’ या ‘सावधानी से खेलने’ की कोशिश नहीं की। यही सहवाग का जीनियस था—बिना रुकावट आक्रामक बल्लेबाज़ी।

200 का जादुई क्षण: होल्कर स्टेडियम में गूँज उठा समंदर

195 के बाद स्टेडियम में हर गेंद पर सन्नाटा भी था और गूंज भी। जैसे ही सहवाग ने मैदान के बीच अपने बल्ले को ऊपर उठाया और स्कोर बोर्ड पर 200+ हुआ— पूरा इंदौर उफान मारता हुआ दिखाई दिया। हर किसी के चेहरे पर गर्व था। भारत ने एक ऐसा बल्लेबाज़ दिया, जिसने न सिर्फ टीम बल्कि विश्व क्रिकेट को नया मापदंड दिया।

वीरू का यह जश्न भी खास था— ना कोई अधिक आवेग, ना दिखावा, बस मुस्कान और हाथ उठाकर दर्शकों को धन्यवाद।

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क्यों खास है यह दोहरा शतक?

  1. सबसे तेज़, सबसे आक्रामक दोहरा शतक

जहां सचिन ने 200* एक नियंत्रित, तकनीक-आधारित पारी में बनाया था, वहीं सहवाग का दोहरा शतक तूफान की तरह आया।
तेज़, दमदार और विरोधी गेंदबाज़ों को डराने वाला।

  1. टीम इंडिया का रिकॉर्ड स्कोर

इस मैच में भारतीय टीम ने 418 रन का पहाड़ जैसा स्कोर बनाया—जो उस समय भारत का सबसे बड़ा वनडे स्कोर था।
सहवाग की पारी इस रिकॉर्ड की रीढ़ थी।

  1. विपक्षी टीम पर मनोवैज्ञानिक दबाव

जब ओपनर ही 200+ मार दे, तो विपक्ष की पूरी रणनीति ध्वस्त हो जाती है। वेस्टइंडीज के गेंदबाज़ों के चेहरे पर निराशा साफ दिख रही थी।

  1. ODI क्रिकेट में नई दिशा

वीरू की पारी ने दुनिया को साबित कर दिया कि 200 अब दुर्लभ उपलब्धि नहीं रहेगी। इसके बाद रोहित शर्मा, मार्टिन गप्टिल, फखर ज़मान जैसे खिलाड़ियों ने भी दोहरे शतक लगाए| लेकिन शुरुआत सचिन ने की, और उसे तूफानों में बदलने का काम वीरू ने किया।

टीम इंडिया पर असर: आत्मविश्वास और आक्रामकता का नया युग

इस पारी के बाद टीम इंडिया की सोच बदली। ओपनर्स अब सिर्फ ‘इनिंग बिल्ड’ नहीं करते थे, बल्कि ‘मैच खत्म’ कर देते थे। टीम भारत ने सफेद गेंद क्रिकेट में एक नई पहचान बनाई— “अटैक इज़ द बेस्ट डिफेंस।”

वेंगसरकर, गावस्कर, तेंदुलकर—सभी दिग्गजों ने वीरू की इस पारी की तारीफ की और इसे भारतीय क्रिकेट की सबसे आक्रामक उपलब्धियों में से एक बताया।

वीरू की मानसिकता: न दबाव, न डर—बस क्रिकेट का असली आनंद सहवाग की सबसे बड़ी खूबी यही थी कि वे खेल को दिल से खेलते थे। उन्हें आंकड़ों की कोई चिंता नहीं रहती थी। उनका प्रिय डायलॉग—
“बल्ला घूमना चाहिए, चाहे कुछ भी हो।” इस पारी में यह बात शब्दशः सच हुई।

सहवाग ने कहा था कि वे बीच-बीच में गाने गाते रहते थे ताकि दिमाग शांत रहे। यही मानसिक आज़ादी उन्हें महान बनाती है।

वीरेंद्र सहवाग—नाम ही काफी है

साल 2011 का वह दिन भारतीय क्रिकेट में इतिहास बनकर दर्ज है। गाने गुनगुनाते हुए, खुले दिल से खेलते हुए, और आंधी की तरह बल्लेबाज़ी करते हुए वीरेंद्र सहवाग ने साबित किया कि प्रतिभा जब आत्मविश्वास से मिले तो रिकॉर्ड टूटते ही नहीं—बिखर जाते हैं।

उनकी 219 रन की पारी आज भी वनडे क्रिकेट की सबसे मनोरंजक और विस्फोटक पारियों में गिनी जाती है।
यह पारी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं— यह भारतीय क्रिकेट की आक्रामक पहचान का नया जन्म था।

वीरू, तुम सच में— “मुल्तान के सुल्तान” से लेकर “वनडे के तूफ़ान” तक—अद्वितीय हो!

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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