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West Asia Tension – क्या युद्ध में कूदेगा UK Iran-America टकराव के बीच अरब सागर में Britain की परमाणु submarine तैनात?

West Asia Tension - क्या युद्ध में कूदेगा UK Iran-America
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 22, 2026 5:41 अपराह्न
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पश्चिम एशिया इस समय गंभीर सैन्य तनाव के दौर से गुजर रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने अब वैश्विक शक्तियों (global powers) को भी सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसी बीच यूनाइटेड किंगडम (UK) द्वारा अरब सागर में परमाणु ऊर्जा (nuclear energy) से संचालित submarine तैनात किए जाने की खबर ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। British media reports के अनुसार, यह कदम केवल सैन्य उपस्थिति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

ब्रिटेन का बड़ा रणनीतिक कदम, HMS Anson की तैनाती 

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने अपनी अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी HMS Anson को उत्तरी अरब सागर में तैनात किया है। यह submarine nuclear power से संचालित है और लंबी दूरी तक मार करने वाली Tomahawk cruise missiles से लैस बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, यह पनडुब्बी 6 मार्च को पर्थ (ऑस्ट्रेलिया) से रवाना हुई थी। इसकी खासियत यह है कि यह समुद्र में लंबे समय तक बिना सतह पर आए ऑपरेशन कर सकती है, हालांकि संचार (Communications) स्थापित करने के लिए हर 24 घंटे में सतह पर आना पड़ता है। इस तैनाती को specialist uk की “स्ट्रेटेजिक प्रेजेंस” के रूप में देख रहे हैं, जो जरूरत पड़ने पर तत्काल हमले की क्षमता भी रखती है।

क्या युद्ध में शामिल होगा UK?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ब्रिटेन अब सीधे युद्ध में कूद सकता है? ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (PM Keir Starmer) ने शुरुआत में अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई (military action) के लिए ब्रिटिश ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि कोई भी सैन्य कार्रवाई (military action) अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध होनी चाहिए। हालांकि, स्थिति तब बदली जब ईरान ने क्षेत्र में ब्रिटेन के सहयोगी देशों पर हमले तेज कर दिए। इसके बाद ब्रिटेन ने अपने रुख में नरमी दिखाई और अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति देने का संकेत दिया।सूत्रों के मुताबिक, USA अब ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग कर ईरान के मिसाइल बेस को निशाना बना सकता है।

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Diego Garcia और RAF फेयरफोर्ड, रणनीतिक ठिकानों की अहम भूमिका

ब्रिटेन ने अमेरिका को जिन सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति दी है, उनमें RAF Fairford और Diego Garcia प्रमुख हैं। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है, जिसे अमेरिका और ब्रिटेन संयुक्त रूप से संचालित करते हैं। यह बेस रणनीतिक रूप से अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया के बड़े हिस्से को कवर करता है।

यही कारण है कि ईरान ने पहले इस द्वीप को निशाना बनाने की कोशिश भी की थी। हालांकि, उसकी मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन इस घटना ने उसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता को जरूर उजागर कर दिया।

ईरान की मिसाइल क्षमता, खतरे की नई परिभाषा

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल के हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने संभवतः अपने स्पेस लॉन्च व्हीकल (Space Launch Vehicle) को ही सैन्य उपयोग के लिए अनुकूलित कर लिया है।

यदि यह सच है, तो यह वैश्विक सुरक्षा (global security) के लिहाज से बेहद चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि इसका मतलब है कि ईरान अब पारंपरिक सीमाओं (traditional boundaries) से कहीं आगे तक हमला करने में सक्षम है। इसी क्षमता के चलते इज़राइल के Atomic City Dimona को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है।

जानिये पनडुब्बी से हमला, कैसे होता है फैसला?

ब्रिटिश पनडुब्बी से किसी भी हमले के लिए एक सख्त सैन्य और राजनीतिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। HMS Anson के मामले में भी अंतिम निर्णय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के हाथ में होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पनडुब्बी का कैप्टन बिना प्रधानमंत्री की अनुमति के कोई भी हमला नहीं कर सकता। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई पर पूरी तरह राजनीतिक नियंत्रण बना रहे और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन हो।

तीसरे विश्व युद्ध का खतरा, global politics पर असर?

इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति (global politics) को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है। ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता टकराव अब बहुपक्षीय युद्ध (multilateral war) का रूप ले सकता है, जिसमें ब्रिटेन जैसे बड़े देश भी शामिल हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा| खासतौर पर तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार (global trade) और सुरक्षा व्यवस्था पर।

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क्या युद्ध के मुहाने पर खड़ी है दुनिया?

Arabian Sea में ब्रिटेन की परमाणु submarine की तैनाती केवल एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक बड़ा भू-राजनीतिक (geopolitical) संकेत है। यह दर्शाता है कि दुनिया एक बार फिर बड़े युद्ध के खतरे के करीब खड़ी है। हालांकि अभी तक ब्रिटेन ने सीधे युद्ध में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा (official announcement) नहीं की है, लेकिन उसके हालिया फैसले यह जरूर बताते हैं कि वह अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहने के लिए तैयार है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या फिर यह टकराव (confrontation) और भी भयावह रूप लेता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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