व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

लेबनानी सेना के 3 अफसरों की मौत से दहला बॉर्डर इजरायली मिसाइल हमले के बाद सीजफायर पर लगा बड़ा दांव

लेबनानी सेना के 3 अफसरों की मौत से दहला बॉर्डर इजरायली मिसाइल हमले के बाद सीजफायर पर लगा बड़ा दांव
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 7, 2026 11:53 पूर्वाह्न
Follow Us:

बेरूत। पश्चिम एशिया के मोर्चे से इस वक्त की सबसे बड़ी और परेशान करने वाली खबर आ रही है। इजरायल और लेबनान के बीच हफ्तों की माथापच्ची के बाद जो सीजफायर कराया गया था, वह अब पूरी तरह से खटाई में पड़ता दिख रहा है। दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती इलाके में हुए एक ताजा इजरायली ड्रोन हमले ने लेबनानी फौज के तीन सीनियर अधिकारियों को मौत की नींद सुला दिया। इस खूनी वारदात के बाद दोनों मुल्कों के बीच का बारूद एक बार फिर सुलग उठा है। घटना से भड़के लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इस पर बेहद सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे लेबनान की संप्रभुता का सरेआम कत्ल बताते हुए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इजरायल की इस मनमानी पर तुरंत एक्शन लेने की मांग की है।लेबनानी सेना के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह हमला पूरी तरह से एकतरफा और उकसाने वाला था। दरअसल, फौज की एक गाड़ी दक्षिणी इलाके में अपनी रूटीन पेट्रोलिंग पर थी। इसी दौरान आसमान में मंडरा रहे एक इजरायली किलर ड्रोन ने इस गाड़ी को निशाना बनाते हुए मिसाइल दाग दी। हमला इतना सटीक और भीषण था कि गाड़ी में मौजूद एक ब्रिगेडियर जनरल, एक कप्तान और एक जवान को संभलने तक का मौका नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।जैसे ही यह खबर बेरूत पहुंची, पूरे देश में हड़कंप मच गया और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लेबनानी आर्मी ने साफ कर दिया है कि उनके शहीद अफसर किसी भी तरह के टकराव में शामिल नहीं थे, वे केवल देश की सरहद पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

बेरूत ने कहा- अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है

सैन्य अफसरों की इस शहादत के बाद लेबनान सरकार का पारा सातवें आसमान पर है। राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल की नीयत कभी साफ नहीं रही। वह जानबूझकर ऐसे हालात पैदा कर रहा है ताकि इलाके में शांति की कोई भी कोशिश कामयाब न हो सके। आउन ने दोटूक कहा, “हम अमन चाहते हैं, जंग नहीं। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हमारी सेना पर घात लगाकर हमले किए जाएं और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। इस दुस्साहस की कीमत चुकानी होगी।”लेबनान ने अब इस पूरे कांड को लेकर अमेरिका, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बेरूत का कहना है कि अगर इजरायल के इन हवाई हमलों को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह सीजफायर महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगा और पूरा मिडिल ईस्ट फिर से भीषण युद्ध की आग में झुलसने लगेगा।

read more :

इजरायल का घिसा-पिटा तर्क: ‘हमारा निशाना हिजबुल्लाह था’

उधर, चारों तरफ से घिरने के बाद इजरायली खेमे ने भी इस पर अपनी सफाई जारी की है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज ने हमेशा की तरह वही पुराना राग अलापा है कि उनके निशाने पर लेबनानी आर्मी नहीं थी। इजरायल का दावा है कि उनके कमांडरों को खुफिया इनपुट मिले थे कि उस खास इलाके में हिजबुल्लाह के लड़ाके किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए मूवमेंट कर रहे थे। इजरायल के मुताबिक, यह कार्रवाई सिर्फ उस संभावित खतरे को टालने के लिए की गई थी और लेबनानी फौज का मारा जाना एक ‘गलतफहमी’ का नतीजा है।हालांकि, लेबनान के रक्षा मंत्रालय ने इजरायल के इस बहाने को पूरी तरह से बकवास और कोरा झूठ करार दिया है। लेबनानी अधिकारियों ने कहा कि इजरायल अपनी हर सैन्य ज्यादती और कत्लेआम को छिपाने के लिए हिजबुल्लाह का नाम ले लेता है, लेकिन इस बार उसकी यह चालाकी चलने वाली नहीं है।

खतरे में सीजफायर, कूटनीति के छूटे पसीने

याद रहे कि अभी चंद दिनों पहले ही वॉशिंगटन और पेरिस के भारी कूटनीतिक दबाव के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि वे सीमाओं पर हथियार शांत रखेंगे। इस समझौते के बाद सीमा पर रहने वाले बेकसूर नागरिकों के घरों में वापसी की उम्मीद जगी थी।लेकिन तीन जांबाज अफसरों के जनाजे उठने के बाद अब इस पूरे शांति समझौते की रीढ़ टूट चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों की मानें तो इस घटना ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को इतना गहरा कर दिया है कि अब किसी भी तरह की बातचीत की मेज सजना नामुमकिन लग रहा है।

आगे की राह: क्या फिर छिड़ेगी खूनी जंग?

इस पूरे विवाद की असली जड़ दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह का एक्टिव होना है। इजरायल का आरोप है कि सीजफायर की आड़ में हिजबुल्लाह अपनी ताकत बढ़ा रहा है, जो उसकी सुरक्षा के लिए परमानेंट सिरदर्द है। वहीं, हिजबुल्लाह का कहना है कि वह लेबनान की धरती पर इजरायली घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब देता रहेगा।गाजा से लेकर बेरूत तक, पूरा इलाका इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। ऐसे में लेबनानी सेना पर हुआ यह हमला आग में घी डालने का काम कर चुका है। फिलहाल, व्हाइट हाउस से लेकर यूरोपीय देशों तक, हर कोई दोनों पक्षों से संयम बरतने की रटी-रटाई अपील कर रहा है। लेकिन असल सच यही है कि आने वाले 48 घंटे बेहद नाजुक हैं। अगर कूटनीतिक स्तर पर इस डैमेज को कंट्रोल नहीं किया गया, तो सीमा पर एक और विनाशकारी जंग शुरू होना बिल्कुल तय है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment