वैश्विक उथल-पुथल बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न देशों के बीच गहरे होते अविश्वास के माहौल के बीच रक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) ने अपनी वार्षिक ‘सिपरी ईयरबुक 2026’ जारी की है। इस नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों को कम करने के दशकों पुराने प्रयास अब कमजोर पड़ते दिख रहे हैं और दुनिया एक नए परमाणु युग की तरफ कदम बढ़ा रही है।
इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में दक्षिण एशिया विशेष रूप से भारत की रणनीतिक तैयारियों को लेकर इस रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने सैन्य और रणनीतिक मोर्चे पर एक नया और मजबूत मुकाम हासिल कर लिया है।
भारत का परमाणु भंडार- 2 वर्षों में 180 से बढ़कर हुआ 190
सिपरी ईयरबुक 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत ने पिछले दो वर्षों में अपनी न्यूनतम विश्वसनीय निवारण (Minimum Credible Deterrence) की नीति के तहत अपने परमाणु हथियारों के बेड़े का धीरे-धीरे विस्तार किया है।
- परमाणु हथियारों की संख्या- जहां दो साल पहले भारत के पास परमाणु हथियारों की अनुमानित संख्या 180 थी वहीं जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार यह बढ़कर 190 हो गई है। यानी भारत ने पिछले दो सालों में अपने भंडार में 10 नए परमाणु वॉरहेड्स शामिल किए हैं।
- पाकिस्तान पर बढ़त- इस विस्तार के साथ ही भारत ने अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर रणनीतिक रूप से एक बड़ी बढ़त बना ली है। सिपरी के मुताबिक वर्तमान में पाकिस्तान के पास परमाणु हथियारों की संख्या 170 पर स्थिर बनी हुई है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत अब परमाणु हथियारों के मामले में पाकिस्तान से 20 हथियार आगे निकल चुका है।
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पहली बार मोर्चे पर तैनात किए 12 परमाणु वॉरहेड
इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि भारत ने पहली बार शांति काल (Peacetime) के दौरान 12 परमाणु वॉरहेड सक्रिय मोर्चे पर तैनात किए हैं। > रणनीतिक बदलाव- लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि भारत शांति काल के दौरान अपने परमाणु वॉरहेड्स (हथियारों) को मिसाइल लॉन्चर्स से अलग सुरक्षित स्थानों पर अलग रखता है। लेकिन हाल के दिनों में मिसाइलों को कैनिस्टराइज्ड (रेडी-टू-लॉन्च स्थिति में कंटेनर में रखना) करने और समुद्र में पनडुब्बियों के जरिए पेट्रोलिंग बढ़ाने के बाद यह अनुमान लगाया गया है कि भारत ने शांति काल में भी कुछ वॉरहेड्स को उनके लॉन्चर्स के साथ जोड़ने (Mating) की शुरुआत कर दी है।
सिपरी का अनुमान है कि भारत ने अपनी रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी (SSBN) पर गश्त के दौरान इन परमाणु वॉरहेड्स को तैनात करना शुरू किया है जो भारत के ‘परमाणु ट्रायड’ (जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता) की परिपक्वता को दर्शाता है।
रक्षा बजट और वैश्विक खर्च में भारत का स्थान
अपनी सैन्य ताकत और परमाणु आधुनिकीकरण को बनाए रखने के लिए भारत ने अपने रक्षा बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।
- सैन्य खर्च- वर्ष 2025 में भारत का कुल सैन्य खर्च 92.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
- वैश्विक रैंकिंग- भारी-भरकम रक्षा बजट के साथ भारत दुनिया में सैन्य खर्च करने के मामले में पांचवें स्थान पर बरकरार है।
चीन-पाकिस्तान पर केंद्रित भारत की नई रणनीति
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार भारत की परमाणु आधुनिकीकरण नीति अब केवल पाकिस्तान केंद्रित नहीं रह गई है बल्कि इसका झुकाव तेजी से चीन की तरफ बढ़ रहा है।
- चीन की चुनौती- चीन वर्तमान में अपनी परमाणु क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है और उसके पास परमाणु वॉरहेड्स की संख्या बढ़कर 620 तक पहुंच गई है। चीन के इस बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत अब ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों (जैसे अग्नि-V) और मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो पूरे चीन के किसी भी हिस्से को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
- पाकिस्तान की स्थिति- यद्यपि पाकिस्तान की संख्या 170 पर स्थिर है लेकिन वह अभी भी नए डिलीवरी सिस्टम विकसित करने और विखंडनीय सामग्री (Fissile Material) का स्टॉक बढ़ाने में लगा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच उपजे एक गंभीर सैन्य संकट के दौरान साइबर ऑपरेशंस का इस्तेमाल देखा गया था लेकिन दोनों ही पक्षों ने तनाव को परमाणु स्तर तक बढ़ने से रोक लिया।
वैश्विक परमाणु परिदृश्य की स्थिति
अगर दुनिया भर की बात करें तो जनवरी 2026 तक दुनिया के 9 परमाणु-संपन्न देशों (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल) के पास कुल मिलाकर 12,187 परमाणु हथियार हैं।
- इनमें से 9,745 वॉरहेड्स सैन्य बेड़े में संभावित उपयोग के लिए तैयार स्थिति में हैं।
- लगभग 4,012 वॉरहेड्स को मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा चुका है।
- दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा अकेले रूस और अमेरिका के पास है।
सिपरी की 2026 की रिपोर्ट साफ करती है कि भारत अपनी ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले परमाणु हमला न करने) की नीति पर कायम रहते हुए भी अपनी सुरक्षा तैयारियों को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहता। चीन के आधुनिकीकरण और पाकिस्तान की हरकतों के बीच भारत द्वारा 190 परमाणु हथियार हासिल करना और 12 वॉरहेड्स की सक्रिय तैनाती करना देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने की दिशा में उठाया गया एक बेहद मजबूत और जरूरी रणनीतिक कदम है।







