भारतीय रक्षा क्षेत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय में केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (PVSM, UYSM, AVSM) को भारतीय सेना का अगला थल सेना प्रमुख (Chief of Army Staff – COAS) नियुक्त करने की आधिकारिक घोषणा की है। वर्तमान थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून 2026 को अपनी गरिमामयी सेवाओं से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसी दिन दोपहर बाद लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ देश के 31वें थल सेना प्रमुख के रूप में भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। सरकार द्वारा जारी वक्तव्य के अनुसार जनरल के रूप में उनका यह कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक रहेगा।
यह रणनीतिक नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और भारतीय सेना आधुनिकीकरण एवं ‘थियेटराइजेशन’ (Unified Commands) के दौर से गुजर रही है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का लगभग चार दशकों का समृद्ध सैन्य अनुभव भारतीय सेना को और अधिक सशक्त और भविष्य के युद्धों के अनुकूल बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
प्रारंभिक जीवन, पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की रगों में देश सेवा और सैन्य अनुशासन बचपन से ही समाया हुआ है। वह एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एक सम्मानित अधिकारी रहे हैं जो 1997 में एडजुटेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए धीरज सेठ ने भी देश सेवा का मार्ग चुना।
उनकी शैक्षणिक और सैन्य प्रशिक्षण पृष्ठभूमि अत्यंत उत्कृष्ट रही है
- नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA)- वह एनडीए खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं जहाँ उन्होंने सैन्य कौशल की बुनियादी शिक्षा प्राप्त की।
- इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA)- देहरादून स्थित आईएमए से उन्होंने अपना कड़ा सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया।
- प्रतिष्ठित संस्थान- वह डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (वेलिंगटन), आर्मी वॉर कॉलेज (महू) और नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) जैसी देश की शीर्ष सैन्य अकादमिक संस्थाओं के पूर्व छात्र रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण- उन्होंने फ्रांस के पेरिस में ‘कमांड एंड स्टाफ कोर्स’ और अमेरिका में हायर कमांड कोर्स की शिक्षा प्राप्त की है जिससे उन्हें वैश्विक सैन्य रणनीतियों की गहरी समझ मिली।
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शानदार सैन्य सफर और अनुभव (1986 से 2026)
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को 20 दिसंबर 1986 को भारतीय सेना की प्रतिष्ठित आर्मर्ड कॉर्प्स (Armoured Corps) में कमीशन दिया गया था। अपने लगभग 40 वर्षों के शानदार सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिचालन (Operational), रणनीतिक (Strategic) और प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है।
प्रमुख कमांड नियुक्तियाँ (Command Assignments)
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के पास भारतीय सेना के दो सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड्स का नेतृत्व करने का अनूठा और दुर्लभ गौरव प्राप्त है
- दक्षिणी कमान (Southern Command) और दक्षिण-पश्चिमी कमान (South Western Command)- उन्होंने इन दोनों बड़ी कमानों के प्रमुख के रूप में लगभग ढाई वर्षों तक काम किया और देश की सीमाओं की रणनीतिक निगरानी की।
- सुदर्शन चक्र कॉर्प्स (Sudarshan Chakra Corps)- उन्होंने भारतीय सेना की इस प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन (आक्रामक वाहिनी) की कमान संभाली।
- दिल्ली एरिया (Delhi Area)- उन्होंने जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC), दिल्ली एरिया के पद पर रहते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व किया।
- अन्य फील्ड कमांड- उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी थिएटर में एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियान के तहत ‘यूनिफॉर्म फोर्स’ (Counter Insurgency Force) का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया है।
महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक नियुक्तियाँ
वर्तमान में वह देश के 49वें उप सेना प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff – VCOAS) के रूप में कार्यरत हैं जिसका कार्यभार उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को संभाला था। इससे पहले उन्होंने कई नीतिगत पदों पर काम किया
- क्षमता विकास (Capability Development)- उन्होंने ‘कर्नल कैपेबिलिटी डेवलपमेंट फॉर मैकेनाइज्ड फोर्सेज’ और ‘अतिरिक्त महानिदेशक क्षमता विकास’ (ADG Capability Development) के रूप में सेना के हथियारों और उपकरणों के आधुनिकीकरण में अग्रणी भूमिका निभाई।
- रणनीतिक योजना- वह मुख्यालय दक्षिण-पश्चिमी कमान में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशन्स) और रणनीतिक योजना निदेशालय में ब्रिगेडियर पर्सपेक्टिव प्लान्स एंड एक्विजिशन के पद पर रहे।
- अंतरराष्ट्रीय अनुभव- वर्ष 1995-96 के दौरान उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UN Mission in Angola) में ऑपरेशन्स ऑफिसर के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व किया।
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सैन्य सम्मान और पदक
देश के प्रति उनकी असाधारण और निष्ठावान सेवाओं के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा कई प्रतिष्ठित सैन्य पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है
- परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM – 2025)- शांति काल में सैन्य सेवा के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान।
- उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM – 2026)- युद्ध या उच्च परिचालन परिस्थितियों में विशिष्ट सेवा के लिए।
- अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM – 2022)- असाधारण क्रम की विशिष्ट सेवा के सम्मान में।
नए सेना प्रमुख के समक्ष आगामी चुनौतियाँ और प्राथमिकताएँ
30 जून 2026 को पदभार संभालने के बाद जनरल धीरज सेठ के सामने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां होंगी
| मुख्य प्राथमिकताएँ | विवरण व प्रभाव |
| सैन्य थियेटराइजेशन (Theatrisation) | थल, नभ और जल सेना को मिलाकर एकीकृत ‘थिएटर कमांड्स’ के गठन की प्रक्रिया को गति देना। |
| तकनीकी आधुनिकीकरण | सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और आधुनिक हथियारों का समावेश। |
| आत्मनिर्भर भारत (Indigenisation) | रक्षा उपकरणों के निर्माण में विदेशी निर्भरता को कम कर ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना। |
| सीमा सुरक्षा प्रबंधन | वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन और नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान की चुनौतियों का कड़ा मुकाबला करना। |
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का थल सेना प्रमुख के रूप में चयन योग्यता, समर्पण और चार दशकों के बेदाग सैन्य ट्रैक रिकॉर्ड का परिणाम है। रणनीतिक योजना, आर्मर्ड ऑपरेशन्स और आधुनिक क्षमता विकास में उनकी विशेषज्ञता भारतीय सेना को समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में नई धार देगी। उनका यह कार्यकाल देश की रक्षा प्रणालियों को और अधिक आत्मनिर्भर, आधुनिक और आक्रामक बनाने की दिशा में एक स्वर्णिम अध्याय सिद्ध होगा।







